जुबान और कंठ का सदुपयोग कर दुर्लभ मनुष्य जीवन को सकारात्मक ऊर्जा से लबरेज बनाएं
जुबान और कंठ का सदुपयोग कर दुर्लभ मनुष्य जीवन को सकारात्मक ऊर्जा से लबरेज बनाएं
विश्व विख्यात नारायण रैकी सत्संग परिवार मुंबई की संस्थापक राज दीदी का प्रेरक व्याख्यान
इंदौर, । ईश्वर ने दुर्लभ मनुष्य जीवन तो दिया ही है, जुबान पर लक्ष्मी और कंठ में सरस्वती का वास भी इसलिए दिया है कि हम अपनी वाणी का उपयोग निंदा, चुगली, आत्म प्रशंसा, झूठ और अन्य अनैतिक कार्यों के बजाय अपने तन, मन, धन और रिश्तों को पवित्र एवं मजबूत बनाने के लिए करें, लेकिन विडंबना यह है कि हम इन सब बुराइयों में डूबकर स्वयं का नुकसान कर रहे हैं। हमारी सोच नकारात्मक हो गई है। जब असफलता मिलती है तो क्रोध आता है और क्रोध के कारण ही रक्तचाप और अन्य बीमारियां हमें घेर रही हैं। पूजा, जप, आरती और प्रार्थना के बजाय हम अपने कंठ का दुरुपयोग दूसरों का अनादर करने या उन पर दोषारोपण करने जैसे कामों में कर रहे हैं। समय रहते हम ईश्वर द्वारा प्रदत्त अंगों से सदगुणों को आत्मसात करें तो जीवन में बहुत कुछ बदलाव आ सकता है। हम जुबान और कंठ का सदुपयोग कर इस मनुष्य जीवन को सकारात्मक ऊर्जा से लबरेज बना सकते हैं।
विश्व विख्यात नारायण रैकी सत्संग परिवार मुंबई की संस्थापक और प्रख्यात रैकी विशेषज्ञ और राज दीदी के नाम से प्रख्यात श्रीमती राजेश्वरी मोदी ने मंगलवार को अग्रवाल समाज इंदौर फाउंडेशन एवं नारायण रैकी सत्संग परिवार इंदौर की मेजबानी में रवीन्द्र नाट्य गृह में आयोजित अपने प्रवचन और व्याख्यान कार्यक्रम के दौरान ऐसी अनेक बातें कही, जो व्यक्ति के जीवन को सक्षम और संपन्न बना सकती हैं। वरिष्ठ समाजसेवी विनोद-नीना अग्रवाल, प्रेमचंद गोयल, श्रीमती कृष्णा-विजय गोयल, विष्णु बिंदल, श्रीमती प्रेमलता टीकमचंद गर्ग, श्याम सिंघल, अजय मंगल, राजेन्द्र समाधान, अरविंद वेल्युअर एवं सत्संग परिवार इंदौर केन्द्र की प्रमुख धनश्री दीदी ने दीप प्रज्ज्वलन कर इस दिव्य आयोजन का शुभारंभ किया। प्रारंभ में फाउंडेशन की ओर से किशोर-रेखा गोयल, संजय-रेखा बांकड़ा, नितिन खंडेलवाल आदि ने दुपट्टा एवं गुलदस्ता भेंटकर राज दीदी का स्वागत किया। अतिथि परिचय किशोर गोयल ने दिया।
अपने उदबोधन में राज दीदी ने करीब डेढ़ घंटे के धाराप्रवाह उदबोधन में अनेक ऐसी बातें बताई, जो परमात्मा ने प्रत्येक मनुष्य को प्रदान की है, लेकिन न तो मनुष्य उनका सही उपयोग कर रहा है और न ही उनकी विशेषताओं से अवगत है। जैसे उन्होंने कहा कि ईश्वर ने हमें वाणी दी, वाणी के लिए जुबान दी। हम जो कुछ अर्जित करते हैं, वह जुबान से ही करते हैं। जुबान में लक्ष्मी का वास माना गया है। लक्ष्मी की प्राप्ति हमारे भाग्य से नहीं जुबान के प्रयोग से होती है। इसी तरह कंठ में सरस्वती का वास माना गया है, जिसका उपयोग हमें अच्छे कार्यों में करना चाहिए, लेकिन होता यह है कि हम अपने इस कंठ का उपयोग निंदा, चुगली, आत्म प्रशंसा, झूठ और अन्य अनैतिक कार्यों में कर रहे हैं। तन, मन धन और हमारे रिश्ते लक्ष्मी और सरस्वती के सदुपयोग से ही समृद्ध और सक्षम बनते हैं। हम जहां कहीं रहें, वहां यदि नकारात्मक और गंदी विचारधारा रखेंगे तो स्वयं का ही नुकसान करेंगे।
राज दीदी ने परिवार को खुशहाल और सम्पन्न बनाने का एक और मंत्र दिया, उन्होंने कहा कि बहू और बेटी यदि परिवार में रहकर सास, ननद, जेठानी, और घर के अन्य सदस्यों से प्राथमिकता के आधार पर सम्मान देने की भावना रखे और उन्हें प्रसन्न तथा संतुष्ट रखें तो आपके परिवार में धन की वृद्धि भी होगी और मानसिक तनाव से भी मुक्ति मिलेगी। बेईमानी, चोरी-चकारी और अन्य गलत तरीकों से हड़पी या चुराई हुई कोई चीज भी घर में नहीं लाना चाहिए। जीवन को संवारने के ऐसे छोटे-छोटे अनेक मंत्र हैं, जिनकी मदद से हम स्वयं को एक श्रेष्ठ और सभ्य के साथ-साथ जिम्मेदार नागरिक भी बना सकते हैं। यदि हम घर के बड़े-बुजुर्गों के साथ केवल 10 मिनट के लिए ही उनके उनके पास बैठ जाएं तो उनकी सकारात्मक ऊर्जा हमारे जीवन की दशा और दिशा बदल सकती है। यदि हम प्रतिदिन राम एक, राम दो, राम तीन से लेकर राम 21 तक की माला का जाप भी कर लेंगे तो हमारी वैचारिक शुद्धता हमें नया आत्मबल , जोश और उत्साह प्रदान करेगी। राज दीदी के उदबोधन के दौरान रवीन्द्र नाट्य गृह में पूरी तरह से पिन ड्रॉप साइलेंट जैसी स्थिति बनी रही और खचाखच भरे सभागृह ने पूरे समय एकाग्र होकर उनकी बातों को सुना और समझा। अनेक प्रसंगों पर खूब तालियां भी बजी।



